|
| |
| |
श्लोक 14.56.35  |
इत्युक्त: प्राह तां पत्नीमेवमस्त्विति गौतम:।
उत्तङ्कोऽपि वने शून्ये राजानं तं ददर्श ह॥ ३५॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| यह सुनकर गौतम ने अपनी पत्नी से कहा, ‘ठीक है, ऐसा ही हो।’ दूसरी ओर उत्तंक एक निर्जन वन में गए और राजा सौदास से मिले। |
| |
| On hearing this Gautama said to his wife, 'Okay, let it be so.' On the other hand Uttanka went to a deserted forest and met King Saudasa. |
| |
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि उत्तङ्कोपाख्याने कुण्डलाहरणे षट्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें उत्तंकके उपाख्यानमें कुण्डलाहरणविषयक छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५६॥
|
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|