Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.56.30: हे जनमेजय! तब 'बहुत अच्छा' कहकर उत्तंक ने अपनी गुरुपत्नी की आज्ञा स्वीकार कर ली और उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा से वे कुण्डल लाने के लिए चल पड़े। | mahabharat अध्याय 14.56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तथेति प्रतिश्रुत्य जगाम जनमेजय।
गुरुपत्नीप्रियार्थं वै ते समानयितुं तदा॥ ३०॥
अनुवाद
हे जनमेजय! तब 'बहुत अच्छा' कहकर उत्तंक ने अपनी गुरुपत्नी की आज्ञा स्वीकार कर ली और उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा से वे कुण्डल लाने के लिए चल पड़े।
O Janamejaya! Then saying 'very good', Uttanka accepted the orders of his Guru's wife and with the desire to please her, he set out to bring those earrings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥