Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.56.21: गौतम बोले - "ब्राह्मण! श्रेष्ठ पुरुष कहते हैं कि गुरुजनों को संतुष्ट करना ही उनके लिए सर्वोत्तम दक्षिणा है। मैं आपकी सेवा से अत्यंत संतुष्ट हूँ, इसमें कोई संदेह नहीं है।" | mahabharat अध्याय 14.56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गौतम उवाच
दक्षिणा परितोषो वै गुरूणां सद्भिरुच्यते।
तव ह्याचरतो ब्रह्मंस्तुष्टोऽहं वै न संशय:॥ २१॥
अनुवाद
गौतम बोले - "ब्राह्मण! श्रेष्ठ पुरुष कहते हैं कि गुरुजनों को संतुष्ट करना ही उनके लिए सर्वोत्तम दक्षिणा है। मैं आपकी सेवा से अत्यंत संतुष्ट हूँ, इसमें कोई संदेह नहीं है।"
Gautam said - Brahman! The noble men say that satisfying the Gurus is the best Dakshina for them. I am very satisfied with the service you have done, there is no doubt about it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥