चित्तं च सुप्रसन्नं मे त्वद्भावगतमच्युत।
विनिवृत्तं च मे शापादिति विद्धि परंतप॥ २॥
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अच्युत! अब मेरा मन आपके प्रति अत्यंत प्रसन्न और भक्ति से परिपूर्ण है; इसलिए आपको शाप देने के विचार से मुक्त समझो।॥2॥
O Achyuta, the tormentor of enemies! Now my mind is extremely happy and filled with devotion towards you; therefore consider it to be free from the thought of cursing you. ॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥