Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.54.8-9: भृगुश्रेष्ठ! ओंकार से प्रारम्भ होने वाले चारों वेदों को मुझे ही जानना चाहिए। यज्ञ में यूप, सोम, चरु, देवताओं को तृप्त करने वाला होम, होता और हवन सामग्री भी मुझे ही जाननी चाहिए। भृगुनंदन! अध्वर्यु, कल्पक और सुसंस्कृत हविष्य - ये सब मेरे ही स्वरूप हैं। | mahabharat अध्याय 14.54: भगवान् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भृगुश्रेष्ठ! ओंकार से प्रारम्भ होने वाले चारों वेदों को मुझे ही जानना चाहिए। यज्ञ में यूप, सोम, चरु, देवताओं को तृप्त करने वाला होम, होता और हवन सामग्री भी मुझे ही जाननी चाहिए। भृगुनंदन! अध्वर्यु, कल्पक और सुसंस्कृत हविष्य - ये सब मेरे ही स्वरूप हैं।
Bhrigu Shrestha! The four Vedas starting with Omkar should be considered only by me. In the Yagya, Yup, Soma, Charu, the Homa that satisfies the Gods, Hota and the havan materials should also be known to Me only. Bhrigunandan! Adhvaryu, Kalpak and well-cultivated Havishya – all these are my forms.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥