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mahabharat 14.54.1: उत्तंक ने कहा - केशव! जनार्दन! आप उत्तम आध्यात्मिक तत्त्व का यथार्थ वर्णन कीजिए। उसे सुनकर मैं आपके कल्याण के लिए आपको आशीर्वाद या शाप दूँगा।   |   mahabharat अध्याय 14.54: भगवान‍् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.54.1 
उत्तङ्क उवाच
ब्रूहि केशव तत्त्वेन त्वमध्यात्ममनिन्दितम्।
श्रुत्वा श्रेयोऽभिधास्यामि शापं वा ते जनार्दन॥ १॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने कहा - केशव! जनार्दन! आप उत्तम आध्यात्मिक तत्त्व का यथार्थ वर्णन कीजिए। उसे सुनकर मैं आपके कल्याण के लिए आपको आशीर्वाद या शाप दूँगा।
 
Uttanka said – Keshav! Janardan! You describe the best spiritual essence accurately. After listening to him, I will bless or curse you for your welfare.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)