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उत्तङ्क उवाच
ब्रूहि केशव तत्त्वेन त्वमध्यात्ममनिन्दितम्।
श्रुत्वा श्रेयोऽभिधास्यामि शापं वा ते जनार्दन॥ १॥
अनुवाद
उत्तंक ने कहा - केशव! जनार्दन! आप उत्तम आध्यात्मिक तत्त्व का यथार्थ वर्णन कीजिए। उसे सुनकर मैं आपके कल्याण के लिए आपको आशीर्वाद या शाप दूँगा।
Uttanka said – Keshav! Janardan! You describe the best spiritual essence accurately. After listening to him, I will bless or curse you for your welfare.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥