Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.9: पिछले अध्याय में मच्छर और गूलर के उदाहरण से यह बताया गया है कि भोगनेवाला अचेतन जीव सनातन क्षेत्रज्ञ को नहीं जानता, किन्तु जो क्षेत्रज्ञ है, वह जानता है कि भोगनेवाला आत्मा है और भोगनेवाला जीव ही जीव है।॥9॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्याख्यातं पूर्वकल्पेन मशकोदुम्बरं यथा।
भुज्यमानं न जानीते नित्यं सत्त्वमचेतनम्।
यस्त्वेवं तं विजानीते यो भुङ्क्ते यश्च भुज्यते॥ ९॥
अनुवाद
पिछले अध्याय में मच्छर और गूलर के उदाहरण से यह बताया गया है कि भोगनेवाला अचेतन जीव सनातन क्षेत्रज्ञ को नहीं जानता, किन्तु जो क्षेत्रज्ञ है, वह जानता है कि भोगनेवाला आत्मा है और भोगनेवाला जीव ही जीव है।॥9॥
In the previous chapter, with the example of a mosquito and a fig tree, it has been explained that the unconscious entity that is being enjoyed does not know the eternal Kshetrajna (knower of the field), but the one who is the knower of the field knows that the one who enjoys is the Self and that which is enjoyed is the entity.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥