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mahabharat 14.50.46-48h: श्वेत, काला, लाल, नीला, पीला, लाल, छोटा, बड़ा, मोटा, पतला, चौकोर और गोल - ये तेजस रूप के बारह प्रकार के विस्तार हैं, जिन्हें वृद्ध ब्राह्मण, जो सत्यवादी और धर्म को जानने वाले हैं, जानने योग्य कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 46-48h
 
 
श्लोक  14.50.46-48h 
शुक्लं कृष्णं तथा रक्तं नीलं पीतारुणं तथा॥ ४६॥
ह्रस्वं दीर्घं कृशं स्थूलं चतुरस्रं तु वृत्तवत्।
एवं द्वादशविस्तारं तेजसो रूपमुच्यते॥ ४७॥
विज्ञेयं ब्राह्मणैर्वृद्धैर्धर्मज्ञै: सत्यवादिभि:।
 
 
अनुवाद
श्वेत, काला, लाल, नीला, पीला, लाल, छोटा, बड़ा, मोटा, पतला, चौकोर और गोल - ये तेजस रूप के बारह प्रकार के विस्तार हैं, जिन्हें वृद्ध ब्राह्मण, जो सत्यवादी और धर्म को जानने वाले हैं, जानने योग्य कहते हैं।
 
White, black, red, blue, yellow, red, small, big, fat, thin, square and round - these twelve types of expansion of the Tejas form are said to be knowable by the aged Brahmins who are truthful and knowledgeable about the Dharma. 46-47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)