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mahabharat 14.50.41: इनमें गंध उसका विशेष गुण है । गंध अनेक प्रकार की मानी गई है । मैं उस गंध के गुणों का विस्तारपूर्वक वर्णन करूँगा ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  14.50.41 
पार्थिवश्च सदा गन्धो गन्धश्च बहुधा स्मृत:।
तस्य गन्धस्य वक्ष्यामि विस्तरेण बहून् गुणान्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इनमें गंध उसका विशेष गुण है । गंध अनेक प्रकार की मानी गई है । मैं उस गंध के गुणों का विस्तारपूर्वक वर्णन करूँगा ॥41॥
 
Among these, smell is its special quality. Smell is considered to be of many types. I will describe the qualities of that smell in detail. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)