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mahabharat 14.50.4: जो प्राणी हिंसा करते हैं, नास्तिक वृत्ति अपनाते हैं, तथा लोभ और मोह में फँसे रहते हैं, उन्हें नरक में गिरना पड़ता है ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.50.4 
हिंसापराश्च ये केचिद् ये च नास्तिकवृत्तय:।
लोभमोहसमायुक्तास्ते वै निरयगामिन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जो प्राणी हिंसा करते हैं, नास्तिक वृत्ति अपनाते हैं, तथा लोभ और मोह में फँसे रहते हैं, उन्हें नरक में गिरना पड़ता है ॥4॥
 
Those who commit violence against living beings, adopt an atheistic attitude, and are trapped in greed and attachment, have to fall into hell. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)