Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.27-28: जैसे बुद्धिमान् पुरुष जलमार्गों के विभाग जानकर सुन्दर पतवारों वाली नाव द्वारा जल पर यात्रा करके समुद्र को सहज ही पार कर लेता है और दूसरे किनारे पहुँचकर नाव की आसक्ति त्यागकर आगे बढ़ जाता है; (उसी प्रकार संसार सागर को पार करके बुद्धिमान् पुरुष पहले के साधनों और पदार्थों की आसक्ति त्याग देता है।) रथ पर चलने वाले और पैदल चलने वाले पुरुष के उदाहरण द्वारा यह बात पहले ही कही जा चुकी है॥27-28॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे बुद्धिमान् पुरुष जलमार्गों के विभाग जानकर सुन्दर पतवारों वाली नाव द्वारा जल पर यात्रा करके समुद्र को सहज ही पार कर लेता है और दूसरे किनारे पहुँचकर नाव की आसक्ति त्यागकर आगे बढ़ जाता है; (उसी प्रकार संसार सागर को पार करके बुद्धिमान् पुरुष पहले के साधनों और पदार्थों की आसक्ति त्याग देता है।) रथ पर चलने वाले और पैदल चलने वाले पुरुष के उदाहरण द्वारा यह बात पहले ही कही जा चुकी है॥27-28॥
Just as a wise man, knowing the divisions of the waterways, easily crosses the ocean by travelling on water in a boat with beautiful oars, and on reaching the other side, he abandons the attachment to the boat and moves on; (in the same way, after crossing the ocean of the world, a wise man abandons the attachment to the earlier resources and materials.) This has already been said through the example of a person travelling in a chariot and a person walking on foot.॥27-28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥