श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 49: धर्मका निर्णय जाननेके लिये ऋषियोंका प्रश्न  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.49.1 
ऋषय ऊचु:
को वा स्विदिह धर्माणामनुष्ठेयतमो मत:।
व्याहतामिव पश्यामो धर्मस्य विविधां गतिम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने पूछा - "हे ब्रह्मन्! इस संसार में जितने भी धर्म हैं, उनमें से कौन-सा धर्म करने योग्य है, यह मुझे बताइए; क्योंकि हमें तो धर्म के भिन्न-भिन्न मार्ग एक-दूसरे से दुःखित प्रतीत होते हैं।" ॥1॥
 
The sages asked, "O Brahman! Tell me which of all the religions in this world is considered the best to perform; because to us the different paths of religion seem to be hurt by each other." ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)