ऋषय ऊचु:
को वा स्विदिह धर्माणामनुष्ठेयतमो मत:।
व्याहतामिव पश्यामो धर्मस्य विविधां गतिम्॥ १॥
अनुवाद
ऋषियों ने पूछा - "हे ब्रह्मन्! इस संसार में जितने भी धर्म हैं, उनमें से कौन-सा धर्म करने योग्य है, यह मुझे बताइए; क्योंकि हमें तो धर्म के भिन्न-भिन्न मार्ग एक-दूसरे से दुःखित प्रतीत होते हैं।" ॥1॥
The sages asked, "O Brahman! Tell me which of all the religions in this world is considered the best to perform; because to us the different paths of religion seem to be hurt by each other." ॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥