| श्री महाभारत » पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व » अध्याय 48: आत्मा और परमात्माके स्वरूपका विवेचन » श्लोक 2 |
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| | | | श्लोक 14.48.2  | उच्छ्वासमात्रमपि चेद् योऽन्तकाले समो भवेत्।
आत्मानमुपसङ्गम्य सोऽमृतत्वाय कल्पते॥ २॥ | | | | | | अनुवाद | | जो मनुष्य मृत्यु के समय आत्मा का ध्यान करता है और जब तक श्वास चले तब तक समता में रहता है, वह अमरता (मोक्ष) प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है।॥2॥ | | | | A person who, at the time of death, meditates on the Self and remains in equanimity for as long as it takes to breathe, becomes entitled to attain immortality (salvation).॥ 2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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