Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.47.8: जो किसी वस्तु की इच्छा नहीं करता और किसी का तिरस्कार नहीं करता, वह इस संसार में रहते हुए ब्रह्म होने में समर्थ हो जाता है ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 14.47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  14.47.8 
यो न कामयते किंचिन्न किंचिदवमन्यते।
इहलोकस्थ एवैष ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जो किसी वस्तु की इच्छा नहीं करता और किसी का तिरस्कार नहीं करता, वह इस संसार में रहते हुए ब्रह्म होने में समर्थ हो जाता है ॥8॥
 
He who does not desire anything and does not disregard anyone becomes capable of becoming Brahman while living in this world. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)