Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.47.6: जो पुरुष तत्त्व का पूर्ण निश्चय करके ज्ञानस्वरूप, आधारहीन आत्मा और समस्त प्राणियों के भीतर स्थित आत्मा को जान लेता है, वह सर्वव्यापी हो जाता है ॥6॥ | mahabharat अध्याय 14.47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्तु वेद निराधारं ज्ञानं तत्त्वविनिश्चयात्।
सर्वभूतस्थमात्मानं स सर्वगतिरिष्यते॥ ६॥
अनुवाद
जो पुरुष तत्त्व का पूर्ण निश्चय करके ज्ञानस्वरूप, आधारहीन आत्मा और समस्त प्राणियों के भीतर स्थित आत्मा को जान लेता है, वह सर्वव्यापी हो जाता है ॥6॥
One who, after having complete determination of the Tattva, knows the form of knowledge, the baseless soul and the soul residing within all living beings, becomes omnipresent. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥