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mahabharat 14.47.5: बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि तप दीपक है (जो परम तत्व को प्रकट करता है), सदाचार धर्म का साधक है, ज्ञान परमात्मा का प्रत्यक्ष है और त्याग सर्वोत्तम तप है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 14.47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.47.5 
तप: प्रदीप इत्याहुराचारो धर्मसाधक:।
ज्ञानं वै परमं विद्यात् संन्यासं तप उत्तमम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि तप दीपक है (जो परम तत्व को प्रकट करता है), सदाचार धर्म का साधक है, ज्ञान परमात्मा का प्रत्यक्ष है और त्याग सर्वोत्तम तप है ॥5॥
 
Wise men say that austerity is a lamp (which reveals the Supreme Reality), good conduct is the seeker of righteousness, knowledge is the manifestation of the Supreme Being and renunciation is the best penance. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)