द्वाविमौ पक्षिणौ नित्यौ संक्षेपौ चाप्यचेतनौ।
एताभ्यां तु परो यो ऽ न्यश्चेतनावान् स उच्यते॥ १६॥
अनुवाद
इस वृक्ष पर दो पक्षी (मन और बुद्धि) रहते हैं, जो सदैव क्रियाशील रहते हैं, किन्तु अचेतन रहते हैं। दूसरा (आत्मा) इन दोनों से श्रेष्ठ है और ज्ञान से युक्त कहा गया है।
There are two birds (mind and intellect) living on this tree, which are always active but are unconscious. The other (soul) is superior to these two and is said to be endowed with knowledge.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥