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mahabharat 14.46.33: खाने के लिए अन्न और तन ढकने के लिए वस्त्र के अतिरिक्त कुछ भी संग्रह न करो। यदि तुम भिक्षा भी मांगो, तो केवल उतना ही ग्रहण करो जितना भोजन के लिए आवश्यक हो, उससे अधिक नहीं।॥33॥   |   mahabharat अध्याय 14.46: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 46: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  14.46.33 
ग्रासादाच्छादनादन्यन्न गृह्णीयात् कथंचन।
यावदाहारयेत् तावत् प्रतिगृह्णीत नाधिकम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
खाने के लिए अन्न और तन ढकने के लिए वस्त्र के अतिरिक्त कुछ भी संग्रह न करो। यदि तुम भिक्षा भी मांगो, तो केवल उतना ही ग्रहण करो जितना भोजन के लिए आवश्यक हो, उससे अधिक नहीं।॥33॥
 
Don't collect anything except food to eat and clothes to cover the body. Even if you ask for alms, accept only as much as is necessary for food and not more than that.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)