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mahabharat 14.46.13: यदि कोई अतिथि आए तो उसे फल-मूल देकर उसका स्वागत करो। कभी आलस्य मत करो। जो भी भोजन तुम्हारे पास हो, उसमें से अतिथि को दान दो। 13.   |   mahabharat अध्याय 14.46: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 46: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.46.13 
समूलफलभिक्षाभिरर्चेदतिथिमागतम्।
यद् भक्ष्यं स्यात् ततो दद्याद् भिक्षां नित्यमतन्द्रित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई अतिथि आए तो उसे फल-मूल देकर उसका स्वागत करो। कभी आलस्य मत करो। जो भी भोजन तुम्हारे पास हो, उसमें से अतिथि को दान दो। 13.
 
If a guest comes, welcome him by offering him fruits and roots. Never be lazy. Give alms to the guest from whatever food you have. 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)