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श्लोक 14.43.31  |
ज्योतिषश्च गुणो रूपं चक्षुषा तच्च गृह्यते।
चक्षु:स्थश्च सदाऽऽदित्यो रूपज्ञाने विधीयते॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| प्रकाश का गुण रूप है और वह नेत्र में स्थित सूर्यदेव की सहायता से सदैव नेत्र द्वारा देखा जाता है ॥31॥ |
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| The quality of light is form and it is always seen by the eye with the help of the Sun-god situated in the eye. ॥ 31॥ |
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