श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  14.43.22 
शब्दलक्षणमाकाशं वायुस्तु स्पर्शलक्षण:।
ज्योतिषां लक्षणं रूपमापश्च रसलक्षणा:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शब्द आकाश का, वायु स्पर्श का, रूप प्रकाश का और रस जल का लक्षण है। 22.
 
Sound is the characteristic of sky, air is the characteristic of touch, form is the characteristic of light and juice is the characteristic of water. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)