श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.43.13 
राजाधिराज: सर्वेषां विष्णुर्ब्रह्ममयो महान्।
ईश्वरत्वं विजानीध्वं कर्तारमकृतं हरिम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्ममय महाविष्णु सबके राजा हैं, उन्हें ही ईश्वर समझना चाहिए। वे सबके रचयिता हैं, परन्तु उनका कोई रचयिता नहीं है।॥13॥
 
Brahmamay Mahavishnu is the king of all, he should be considered as God. He is the creator of all, but there is no creator of him.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)