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mahabharat 14.42.61-62: वास्तव में वही परमेश्वर विष्णु, मित्र, वरुण, अग्नि, प्रजापति, धाता, सृष्टिकर्ता, प्रभु, सर्वव्यापी, समस्त प्राणियों का हृदय और महान आत्मा के रूप में प्रकट होता है ॥61-62॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.42.61-62 
स वै विष्णुश्च मित्रश्च वरुणोऽग्नि: प्रजापति:॥ ६१॥
स हि धाता विधाता च स प्रभु: सर्वतोमुख:।
हृदयं सर्वभूतानां महानात्मा प्रकाशते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में वही परमेश्वर विष्णु, मित्र, वरुण, अग्नि, प्रजापति, धाता, सृष्टिकर्ता, प्रभु, सर्वव्यापी, समस्त प्राणियों का हृदय और महान आत्मा के रूप में प्रकट होता है ॥61-62॥
 
In reality, the same Supreme God is manifested in the form of Vishnu, Mitra, Varun, Agni, Prajapati, Dhata, Creator, Lord, omnipresent, the heart of all beings and the great soul. 61-62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)