जब प्रसन्नचित्त योगी समस्त प्राणियों को अपने अन्तरात्मा में स्थित देखने लगता है, तब वह स्वयं प्रकाशस्वरूप होकर सूक्ष्मतम परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त हो जाता है ॥50॥
When a yogi, with a happy mind, begins to see all living beings situated in his inner being, then he himself becomes a form of light and attains the most subtle, supreme God. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥