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mahabharat 14.42.49: जैसे अग्नि में ईंधन डालने पर वह प्रज्वलित होकर अत्यंत तेजस्वी दिखाई देती है, वैसे ही इन्द्रियों को वश में करने से मनुष्य को भगवान् के विशेष प्रकाश का अनुभव होने लगता है ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  14.42.49 
यथाग्निरिन्धनैरिद्धो महाज्योति: प्रकाशते।
तथेन्द्रियनिरोधेन महानात्मा प्रकाशते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जैसे अग्नि में ईंधन डालने पर वह प्रज्वलित होकर अत्यंत तेजस्वी दिखाई देती है, वैसे ही इन्द्रियों को वश में करने से मनुष्य को भगवान् के विशेष प्रकाश का अनुभव होने लगता है ॥49॥
 
Just as a fire is lit and appears very bright when fuel is added to it, similarly, by controlling the senses one begins to experience the special light of God. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)