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mahabharat 14.42.37-38h: हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! दो पैरों वाले, अनेक पैरों वाले, टेढ़े-मेढ़े चलने वाले और विकृत शरीर वाले प्राणी गर्भ से उत्पन्न होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  14.42.37-38h 
द्विपादबहुपादानि तिर्यग्गतिमतीनि च॥ ३७॥
जरायुजानि भूतानि विकृतान्यपि सत्तमा:।
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! दो पैरों वाले, अनेक पैरों वाले, टेढ़े-मेढ़े चलने वाले और विकृत शरीर वाले प्राणी गर्भ से उत्पन्न होते हैं।
 
O noble Brahmins! The creatures with two legs, many legs, those who walk in a zigzag manner and those with deformed forms are the ones born from wombs. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)