त्रीणि स्थानानि भूतानां चतुर्थं नोपपद्यते॥ ३२॥
स्थलमापस्तथाऽऽकाशं जन्म चापि चतुर्विधम्।
अण्डजोद्भिज्जसंस्वेदजरायुजमथापि च॥ ३३॥
चतुर्धा जन्म इत्येतद् भूतग्रामस्य लक्ष्यते।
अनुवाद
प्राणियों के रहने के स्थान केवल तीन ही हैं- जल, स्थल और आकाश। चौथा स्थान संभव नहीं है। देहधारियों की चार प्रकार की योनियाँ हैं- अण्डज, वनस्पति, स्वेद और गर्भ। सम्पूर्ण प्राणी समुदाय में केवल यही चार योनियाँ देखी जाती हैं। ॥32-33 1/2॥
There are only three places where living beings live- water, land and sky. The fourth place is not possible. There are four types of births of embodied beings- oviparous, plant-born, sweat-born and womb-born. Only these four types of births are seen in the entire community of beings. ॥32-33 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥