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mahabharat 14.42.28-29h: जगत् की देवी का प्रथम स्वर यहाँ अध्यात्म कहलाता है। वाणी उसका स्वामी है और अग्नि उसका अधिष्ठाता देवता है। 28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  14.42.28-29h 
वैश्वदेवी तत: पूर्वा वागध्यात्ममिहोच्यते॥ २८॥
वक्तव्यमधिभूतं च वह्निस्तत्राधिदैवतम्।
 
 
अनुवाद
जगत् की देवी का प्रथम स्वर यहाँ अध्यात्म कहलाता है। वाणी उसका स्वामी है और अग्नि उसका अधिष्ठाता देवता है। 28 1/2॥
 
The first voice of the goddess of the world is called spirituality here. Statement is his lord and fire is his presiding deity. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)