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mahabharat 14.42.24-25h: अब कर्मेन्द्रियोंसे सम्बन्धित विविध विषयोंका वर्णन किया गया है। तत्त्वदर्शी ब्राह्मण दोनों चरणोंको आध्यात्मिक कहते हैं और गन्तव्यको तथा विष्णुको उनका अधिदेवता कहते हैं। 24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  14.42.24-25h 
अत: परं प्रवक्ष्यामि सर्वं विविधमिन्द्रियम्।
पादावध्यात्ममित्याहुर्ब्राह्मणास्तत्त्वदर्शिन:॥ २४॥
अधिभूतं तु गन्तव्यं विष्णुस्तत्राधिदैवतम्।
 
 
अनुवाद
अब कर्मेन्द्रियोंसे सम्बन्धित विविध विषयोंका वर्णन किया गया है। तत्त्वदर्शी ब्राह्मण दोनों चरणोंको आध्यात्मिक कहते हैं और गन्तव्यको तथा विष्णुको उनका अधिदेवता कहते हैं। 24 1/2॥
 
Now various topics related to the physical senses are described. Tatvadarshi Brahmins call both the feet spiritual and call the destination as their presiding deity and Vishnu as their presiding deity. 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)