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mahabharat 14.42.17: इस प्रकार क्रमशः ग्यारह इन्द्रियाँ बताई गईं। जो विद्वान् इनके तत्त्वों को भलीभाँति जानते हैं, वे अपने को सिद्ध मानते हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  14.42.17 
इत्युक्तानीन्द्रियाण्येतान्येकादश यथाक्रमम्।
मन्यन्ते कृतमित्येवं विदित्वा तानि पण्डिता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार क्रमशः ग्यारह इन्द्रियाँ बताई गईं। जो विद्वान् इनके तत्त्वों को भलीभाँति जानते हैं, वे अपने को सिद्ध मानते हैं ॥17॥
 
In this way eleven senses were described respectively. Scholars who know their principles well consider themselves accomplished. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)