Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.42.15-16: इन इन्द्रियों में पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं। वस्तुतः कान आदि पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ ज्ञानेन्द्रियाँ कहलाती हैं और उनसे भिन्न शेष पाँच कर्मेन्द्रियाँ कर्मेन्द्रियाँ कहलाती हैं। मन, इन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों दोनों से संबंधित है और बुद्धि बारहवीं है।॥15-16॥ | mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन इन्द्रियों में पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं। वस्तुतः कान आदि पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ ज्ञानेन्द्रियाँ कहलाती हैं और उनसे भिन्न शेष पाँच कर्मेन्द्रियाँ कर्मेन्द्रियाँ कहलाती हैं। मन, इन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों दोनों से संबंधित है और बुद्धि बारहवीं है।॥15-16॥
Among these senses, there are five sense organs and five organs of action. In fact, the five sense organs like ears etc. are called sense organs and the remaining five sense organs apart from them are called organs of action. The mind is related to both sense organs and organs of action and the intellect is the twelfth one.॥15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥