vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 4: मरुत्तके पूर्वजोंका परिचय देते हुए व्यासजीके द्वारा उनके गुण, प्रभाव एवं यज्ञका दिग्दर्शन
»
श्लोक 8
श्लोक
14.4.8
खनीनेत्रस्तु विक्रान्तो जित्वा राज्यमकण्टकम्।
नाशकद् रक्षितुं राज्यं नान्वरज्यन्त तं प्रजा:॥ ८॥
अनुवाद
यद्यपि खानिनेत्र बहुत शक्तिशाली था, फिर भी वह विजय प्राप्त करने के बाद भी अबाधित राज्य की रक्षा नहीं कर सका, क्योंकि प्रजा उसे पसंद नहीं करती थी। 8.
Though Khaninetra was very powerful, he could not protect the unobstructed kingdom even after conquering it because the people did not like him. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×