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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 4: मरुत्तके पूर्वजोंका परिचय देते हुए व्यासजीके द्वारा उनके गुण, प्रभाव एवं यज्ञका दिग्दर्शन
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श्लोक 3
श्लोक
14.4.3
प्रसन्धेरभवत् पुत्र: क्षुप इत्यभिविश्रुत:।
क्षुपस्य पुत्र इक्ष्वाकुर्महीपालोऽभवत् प्रभु:॥ ३॥
अनुवाद
प्रसंधि के पुत्र क्षुप थे और क्षुप के पुत्र शक्तिशाली राजा इक्ष्वाकु थे।
Prasandhi's son was Kshupa and Kshupa's son was the powerful king Ikshvaku.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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