जब सारी सामग्री तैयार हो गई, तब पृथ्वी के शासक धर्मात्मा राजा मरुत्त ने अन्य सभी प्रजापालकों के साथ विधिपूर्वक यज्ञ किया।
When all the materials were ready, the righteous King Marutta, the ruler of the earth, along with all the other protectors of the people, performed the yajna in accordance with the rituals.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अश्वमेधपर्वणि संवर्तमरुत्तीये चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अश्वमेधपर्वमें संवर्त और मरुत्तका उपाख्यानविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥