श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 4: मरुत्तके पूर्वजोंका परिचय देते हुए व्यासजीके द्वारा उनके गुण, प्रभाव एवं यज्ञका दिग्दर्शन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  14.4.22 
य ईजे हयमेधानां शतेन विधिवत् प्रभु:।
याजयामास यं विद्वान् स्वयमेवाङ्गिरा: प्रभु:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस प्रभावशाली राजा ने विधिपूर्वक सौ अश्वमेध यज्ञ किये थे। स्वयं विद्वान भगवान् अंगिरा ऋषि ने उनके यज्ञ का संचालन किया था।
 
That influential king had performed hundred Ashwamedha Yagyas according to the rules. The learned Lord himself, sage Angira had conducted his Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)