श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 4: मरुत्तके पूर्वजोंका परिचय देते हुए व्यासजीके द्वारा उनके गुण, प्रभाव एवं यज्ञका दिग्दर्शन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.4.20 
तेजसाऽऽदित्यसदृश: क्षमया पृथिवीसम:।
बृहस्पतिसमो बुद्धॺा हिमवानिव सुस्थिर:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के समान, बुद्धि में बृहस्पति के समान और स्थिरता में हिम पर्वत के समान माना जाता था॥20॥
 
He was considered like the Sun in brightness, the Earth in forgiveness, Jupiter in intelligence and a snowy mountain in stability. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)