श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 4: मरुत्तके पूर्वजोंका परिचय देते हुए व्यासजीके द्वारा उनके गुण, प्रभाव एवं यज्ञका दिग्दर्शन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.4.12 
तस्य धर्मप्रवृत्तस्य व्यशीर्यत् कोशवाहनम्।
तं क्षीणकोशं सामन्ता: समन्तात् पर्यपीडयन्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
परन्तु केवल धर्मपरायण रहने के कारण थोड़े ही दिनों में राजा का कोष खाली हो गया और उसके वाहन आदि भी नष्ट हो गए। अपना कोष खाली हो गया जानकर सामन्त राजाओं ने उसे सब ओर से कष्ट देना आरम्भ कर दिया॥12॥
 
But due to his being devoted only to Dharma, in a few days the king's treasury became empty and his vehicles etc. were also destroyed. Knowing that his treasury had become empty, the feudal kings started tormenting him from all sides.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)