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mahabharat 14.39.4: ये गुण किसी कारणवश या बिना कारण के साथ-साथ रहते हैं; ये साथ-साथ घूमते हैं; ये समूह में भ्रमण करते हैं; और ये शरीर में विद्यमान रहते हैं ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 14.39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 39: सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.39.4 
संहत्य कुर्वते यात्रां सहिता: संघचारिण:।
संघातवृत्तयो ह्येते वर्तन्ते हेत्वहेतुभि:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ये गुण किसी कारणवश या बिना कारण के साथ-साथ रहते हैं; ये साथ-साथ घूमते हैं; ये समूह में भ्रमण करते हैं; और ये शरीर में विद्यमान रहते हैं ॥4॥
 
These qualities remain together with or without any cause; they move about together; they travel in groups; and they are present in the body. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)