Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.38.6-8: श्रद्धा, शील, त्याग, त्याग, पवित्रता, आलस्य से रहित होना, मृदुता, आसक्ति का अभाव, प्राणियों पर दया, चुगली न करना, प्रसन्नता, संतोष, अभिमानशून्यता, शील, सदाचार, शांतिमय कर्मों में शुद्ध प्रवृत्ति, उत्तम बुद्धि, आसक्ति से रहित होना, सांसारिक सुखों से उदासीनता, ब्रह्मचर्य, सब प्रकार का त्याग, निर्दयता, फल की इच्छा न करना और निरन्तर धर्म का पालन करना - ये सब सत्त्वगुण के कार्य हैं ॥6-8॥ | mahabharat अध्याय 14.38: सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रद्धा, शील, त्याग, त्याग, पवित्रता, आलस्य से रहित होना, मृदुता, आसक्ति का अभाव, प्राणियों पर दया, चुगली न करना, प्रसन्नता, संतोष, अभिमानशून्यता, शील, सदाचार, शांतिमय कर्मों में शुद्ध प्रवृत्ति, उत्तम बुद्धि, आसक्ति से रहित होना, सांसारिक सुखों से उदासीनता, ब्रह्मचर्य, सब प्रकार का त्याग, निर्दयता, फल की इच्छा न करना और निरन्तर धर्म का पालन करना - ये सब सत्त्वगुण के कार्य हैं ॥6-8॥
Faith, modesty, renunciation, renunciation, purity, being free from laziness, softness, lack of attachment, kindness to living beings, not gossiping, joy, contentment, pridelessness, modesty, good behaviour, pure inclination to do peaceful deeds, good intelligence, freedom from attachment, indifference from worldly pleasures, celibacy, renunciation of all kinds, ruthlessness, not desiring fruit and continuously following Dharma - all these. These are the works of Sattva Guna. 6-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥