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mahabharat 14.38.11: वे धीर पुरुष सम्पूर्ण पापों का त्याग करके शोक से मुक्त हो जाते हैं और स्वर्ग में जाकर वहाँ सुख भोगने के लिए अनेक शरीर धारण करते हैं ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 14.38: सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 38: सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  14.38.11 
हित्वा सर्वाणि पापानि नि:शोका ह्यथ मानवा:।
दिवं प्राप्य तु ते धीरा: कुर्वते वै ततस्तनू:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे धीर पुरुष सम्पूर्ण पापों का त्याग करके शोक से मुक्त हो जाते हैं और स्वर्ग में जाकर वहाँ सुख भोगने के लिए अनेक शरीर धारण करते हैं ॥11॥
 
Those patient men, having given up all sins, become free from sorrow and, going to heaven, take on many bodies to enjoy the pleasures there. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)