अभिद्रोहस्तथा माया निकृतिर्मान एव च।
स्तैन्यं हिंसा जुगुप्सा च परिताप: प्रजागर:॥ १२॥
दम्भो दर्पोऽथ रागश्च भक्ति: प्रीति: प्रमोदनम्।
द्यूतं च जनवादश्च सम्बन्धा: स्त्रीकृताश्च ये॥ १३॥
नृत्यवादित्रगीतानां प्रसङ्गा ये च केचन।
सर्व एते गुणा विप्रा राजसा: सम्प्रकीर्तिता:॥ १४॥
अनुवाद
विप्रगण! विश्वासघात, मोह, हठ, मान, चोरी, हिंसा, द्वेष, निराशा, सतर्कता, अभिमान, काम, आसक्ति, परमार्थ के लिए भक्ति, विषयों का प्रेम, भोग-विलास, जुआ, मनुष्यों से झगड़ा, स्त्रियों के साथ सम्बन्ध, नाच-गाने में तल्लीन रहना - ये सब राजस गुण कहलाते हैं ॥12-14॥
Vipragana! Betrayal, illusion, stubbornness, honor, theft, violence, hatred, despair, vigilance, pride, lust, attachment, devotion for the sake of good, love of things, pleasure, gambling, quarreling with people, developing relationships with women, being engrossed in dancing and singing - all these are called Rajas qualities. 12-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥