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mahabharat 14.35.7: शिष्य ने कहा - ब्रह्मन्! मैं कहाँ से आया हूँ और आप कहाँ से आए हैं? संसार के सभी जीव-जंतु कहाँ से उत्पन्न हुए हैं? कृपया मुझे परम तत्व का वास्तविक स्वरूप बताइए ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.35.7 
शिष्य उवाच
कुतश्चाहं कुतश्च त्वं तत्सत्यं ब्रूहि यत्परम्।
कुतो जातानि भूतानि स्थावराणि चराणि च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
शिष्य ने कहा - ब्रह्मन्! मैं कहाँ से आया हूँ और आप कहाँ से आए हैं? संसार के सभी जीव-जंतु कहाँ से उत्पन्न हुए हैं? कृपया मुझे परम तत्व का वास्तविक स्वरूप बताइए ॥7॥
 
The disciple said - Brahmin! Where have I come from and where have you come from? From where have all living and non-living creatures of the world originated? Please tell me the true form of the Supreme Reality. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)