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श्लोक 14.35.49  |
तत्त्वानामथ यो वेद सर्वेषां प्रभवाप्ययौ।
स धीर: सर्वभूतेषु न मोहमधिगच्छति॥ ४९॥ |
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| अनुवाद |
| जो सम्पूर्ण तत्त्वों की उत्पत्ति और प्रलय को ठीक-ठीक जानता है, वह समस्त प्राणियों में सबसे अधिक धैर्यवान है और कभी मोह में नहीं पड़ता ॥49॥ |
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| He who knows precisely the origin and dissolution of all elements is the most patient of all creatures and never falls into temptation. ॥ 49॥ |
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