Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.35.47-48: अव्यक्त प्रकृति, महत्तत्त्व, अहंकार, दस इन्द्रियाँ, एक मन, पाँच महाभूत तथा उनके शब्द आदि विशेष गुण - यह चौबीस तत्त्वों का सनातन गान है। तथा एक जीवात्मा - इस प्रकार तत्त्वों की संख्या पच्चीस बताई गई है। 47-48॥ | mahabharat अध्याय 14.35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महानात्मा तथाव्यक्तमहंकारस्तथैव च।
इन्द्रियाणि दशैकं च महाभूतानि पञ्च च॥ ४७॥
विशेषा: पञ्चभूतानामिति सर्ग: सनातन:।
चतुर्विंशतिरेका च तत्त्वसंख्या प्रकीर्तिता॥ ४८॥
अनुवाद
अव्यक्त प्रकृति, महत्तत्त्व, अहंकार, दस इन्द्रियाँ, एक मन, पाँच महाभूत तथा उनके शब्द आदि विशेष गुण - यह चौबीस तत्त्वों का सनातन गान है। तथा एक जीवात्मा - इस प्रकार तत्त्वों की संख्या पच्चीस बताई गई है। 47-48॥
Unmanifested nature, greatness, ego, ten senses, one mind, five great elements and their words etc. special qualities – this is the eternal song of twenty-four elements. And one living soul – thus the number of elements is stated to be twenty-five. 47-48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥