श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  14.35.40 
ब्रह्मचारिकमेवाहुराश्रमं प्रथमं पदम्।
गार्हस्थ्यं तु द्वितीयं स्याद् वानप्रस्थमत: परम्।
तत: परं तु विज्ञेयमध्यात्मं परमं पदम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
आश्रमों में ब्रह्मचर्य प्रथम आश्रम है। गृहस्थ्य दूसरा और वानप्रस्थ तीसरा आश्रम है, उसके बाद संन्यास आश्रम आता है। इसमें आत्मज्ञान सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे परम अवस्था समझना चाहिए॥40॥
 
Brahmacharya is the first ashram among the ashramas. Grihasthya is the second and Vanprastha is the third ashram, after that comes Sanyas Ashram. Self-knowledge is the most important in this, hence it should be considered as the ultimate state.॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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