श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 35: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  14.35.29 
कथं कर्म क्रियात् साधु कथं मुच्येत किल्बिषात्।
के नो मार्गा: शिवाश्च स्यु: किं सत्यं किं च दुष्कृतम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उत्तम कर्म किस प्रकार करने चाहिए ? मनुष्य पापों से कैसे मुक्त हो सकता है ? कौन-से मार्ग हमारे लिए कल्याणकारी हैं ? सत्य क्या है ? और पाप क्या है ?॥29॥
 
‘How should one perform the best deeds? How can a man be freed from sins? Which paths are beneficial for us? What is truth? And what is sin?॥ 29॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas