श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 34: भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा ब्राह्मण, ब्राह्मणी और क्षेत्रज्ञका रहस्य बतलाते हुए ब्राह्मणगीताका उपसंहार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.34.7 
इदं कार्यमिदं नेति न मोक्षेषूपदिश्यते।
पश्यत: शृण्वतो बुद्धिरात्मनो येषु जायते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यह कर्तव्य है, यह कर्तव्य नहीं है - मोक्ष के साधनों में ऐसा नहीं कहा गया है। जिन साधनों में देखने और सुनने वाले की बुद्धि आत्मा के स्वरूप में स्थिर होती है, वे ही सच्चे साधन हैं।॥7॥
 
This is a duty, this is not a duty - this is not said in the means of salvation. The means in which the intellect of the one who sees and hears is fixed in the nature of the soul, are the true means. ॥ 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas