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श्लोक 14.31.6  |
स निगृह्यात्मनो दोषान् साधून् समभिपूज्य च।
जगाम महतीं सिद्धिं गाथाश्चेमा जगाद ह॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने अपने दोषों का दमन किया और सद्गुणों का आदर किया, इसी से उन्हें महान् सफलता प्राप्त हुई और उन्होंने यह कथा गाई -॥6॥ |
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| He suppressed his faults and respected the good qualities. Due to this, he achieved great success and he sang this story -॥ 6॥ |
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