श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 31: राजा अम्बरीषकी गायी हुई आध्यात्मिक स्वराज्यविषयक गाथा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.31.4 
अत्र गाथा: कीर्तयन्ति पुराकल्पविदो जना:।
अम्बरीषेण या गीता राज्ञा पूर्वं प्रशाम्यता॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भूतकाल को जाननेवाले लोग इस प्रसंग में एक कथा कहते हैं। किसी समय शांतिप्रिय राजा अम्बरीष ने यह कथा कही थी॥4॥
 
People having knowledge of the past narrate a tale in this context. Once upon a time, the peace-loving king Ambrish had sung this tale.॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas