श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 31: राजा अम्बरीषकी गायी हुई आध्यात्मिक स्वराज्यविषयक गाथा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.31.13 
इति राज्ञाम्बरीषेण गाथा गीता यशस्विना।
अधिराज्यं पुरस्कृत्य लोभमेकं निकृन्तता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महाप्रतापी अम्बरीष ने स्वराज्य को सर्वोपरि रखते हुए एकमात्र प्रबल शत्रु लोभ का नाश किया और उपर्युक्त श्लोक गाया।
 
Thus the illustrious Ambarisha, keeping the self-rule in the forefront, destroyed the only strong enemy, greed, and sang the above verse.
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि ब्राह्मणगीतासु एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें ब्राह्मणगीताविषयक इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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